Tuesday, 13 October 2015

कहानी एक गाय की


एक दिन गाय और भैंस आपस में बात कर रही थी,

भैंस:- यार! एक बात बता, मेरा दूध सबसे ज्यादा पिया जाता है, तुझसे ज्यादा दूध भी देती हूँ, मेरे दूध का घी, दही, मट्ठा सब स्वादिष्ट होता है पर दुनिया तेरी ही पूजा क्यों करती है, तेरे तो गोबर के गणेश भी बनते है, तेरा मूर्त भी मार्केट में बिकता है,

गाय:- बस कर जा पगली! ये राजनीती है तू नही समझेगी. 

Sunday, 11 October 2015

डाक पे डकैती

लखनऊ में कुल पोस्ट ऑफिस की संख्या 178 जिसमे ब्रांच पोस्ट ऑफिस और सब पोस्ट ऑफिस शामिल है, बताना चाहता हूँ की पोस्ट ऑफिस CBS (CORE  BANKING SERVICE) होने से पहले, एक सब पोस्ट ऑफिस करीब करीब  30 से 50 लाख* सरकारी खाते में जमा करता था एक महीने में और पोस्ट ऑफिस तक़रीबन 1 करोड*, जब से केंद्र ने CBS लागू किया है तब से महीने में एक सब पोस्ट ऑफिस 5 से 8 लाख* और ब्रांच ऑफिस करीब 25 लाख* ही जमा कर पा रहे हैं आपको बताता हु क्यों?

 बात करते हैं IT Modernization

पहले पोस्ट ऑफिस का अपना सर्वर और सॉफ्टवेर था "संचय पोस्ट" जिसमे काम करना बहुत आसान था अब finacle आ गया है इसमें बहुत सारे कोड हैं.

इन्टरनेट SIFI को दिया गया जो की बैंकों से कई साल पहले रिजेक्ट हो चुकी थी, मतलब की स्पीड बहुत ही ख़राब है,

ज्यादातर सब पोस्ट ऑफिस सिंगल हैण्ड है और FINCORE में काम करने के लिए दो लोगो की ज़रूरत है पहला सुपरवाइजर और दूसरा ओपरेटर,

अब बात करते हैं की आखिर सरकार को कितना नुक्सान सहना पद रहा है कुल पोस्ट ऑफिस 178 बीच के आकडे लेते हैं तो पहले एक पोस्ट ऑफिस 50 लाख* महीने में सरकारी खाते में जमा करता था और आज सिर्फ 20 लाख* तो कुल नुकसान होता है 534000000/- अंदाज़न* ये आंकड़े सिर्फ लखनऊ के हैं और 1 महीने के,

कुछ सवाल जो सुर्वे में पूछे गए!

क्या जनता की भीड़ कम हुई?
जवाब जिस काम को पहले करने में ३ मिनट लगते थे आज 10-15 मिनट लगते हैं क्यों की इन्टरनेट बहुत स्लो है और सर्वर की हालत खस्ता है,

क्या कागज़ के लेन देन में कमी आई?
जवाब अब हर एजेंट को भी अपनी रिपोर्ट प्रिंट करवा के लानी है!

केसे होगा देश आगे!

अपने अगले लेख में बात करूँगा पैसे के गिरावट पे.

ये मेरे द्वारा जुटाए गए आंकड़े हैं.*

Thursday, 20 August 2015

ज़रा सोचिये!

 भाई ले डंडा तू भी पीट! ओये पप्पू तू क्यों कोने में खड़ा है इधर आ तू भी पीट! जी हाँ हम बात कर रहे हैं गुड़िया की एक ऐसा त्योहार जिसमे कपडे की बानी गुड़िया को मोहल्ले के लड़के डंडो से पीटते है और गुड़िया बना के लाने का काम लड़कीओ का होता है, कभी मां कभी बेटी कभी बहन तो कभी पत्नी के रूप में पूजी जाने वाली महिलाओं को चौराहे पर पीटा जाए तो यह उनके सम्मान को चोट पहुंचाने जैसा है। ये प्रथा आज से नही बल्कि सदीओ से चली आ रही है, रक्षाबंधन से कुछ दिन पहले नागपंचमी के दिन इसे मनाया जाता है, इस पर्व की कुछ ऐसी मान्यता है की एक राजा की लड़की जिसे प्यार से गुडिय़ा कह के बुलाते थे, वो एक दूसरे राज्य के राजा के बेटे से प्यार करने लगी थी। दुश्मन राज्य के राजा के बेटे से प्रेम की बात गुडिय़ा के भाइयों को रास नहीं आई जिसके चलते वह गुडिय़ा को बीच चौराहे पर लाठी डाँडो से पीट पीट कर मार डाला।
               गुड़िया के भाइयो ने इस याद को ताज़ा रखने  उसी दिन हर साल लड़कीओ से गुड़िया बनवा के लड़को से पिटवाने का आदेश दिए तबसे ले के आज तक ये कुरीती चली आ रही है, आज कल तो हम 3-10 साल के बच्चों को ये त्योहार मानते देख रहे हैं ज़रा सोचिये!

Sunday, 9 August 2015

ना जाने क्यों जब में माँ से आधी रोटी मांगता हुँ, वो एक टुकड़ा तोड़ पूरी रोटी मुझे दे देती है। 

Friday, 26 June 2015

                                                   बरसात कहीं वरदान तो कहीं अभिशाप 

अप्रैल के महीने में जब बारिश हुई तो शेरवासिओ के लिए बड़ा अच्छा मौसम का प्रतीक था, लोग मस्ती के मूड में थे वहीँ देहाती इलाको में माहौल ग़मज़दा था किसान अपनी जेहुँ की फसल बचने के लिए मशक्कत कर रहे थे, वहीँ मानसून की पहली बारिश ने लोगो को गर्मी से तरावट तो दी ही साथ ही साथ किसानो के लिए भी काफी फायदेमंद रही लेकिन शहरवासिओ के लिए ये बारिश उतनी खुशनुमा नही रही, कहीं लोग घरो से पानी निकल रहे थे तो कहीं लोग अपनी दुकानो से सामान ताकी नुकसान काम हो.

Tuesday, 23 June 2015

मेरे एक मरहूम मित्र के साथ कुछ ऐसा हुआ की उनका फ़ोन चोरी हो गया बहुत परेशान थे वो मेरे से सलाह मांगी की भाई आगे क्या किआ जाए मैंने कहा भाई सबसे पहल तो FIR करो, हम लोग गए फिर लिखवाने वह बैठे हवलदार साहब से पूछा,
मित्र :- सर फ़ोन खो गया है FIR करवानी है.
हवलदार:- बेटा हो जाएगी एक application लिख दो.
मित्र :- सर हो गयी.
हवलदार(नाम पढ़ने के बाद):- ओह! बेटा ऐसा है एक affidavit भी लगेगा
मैं:- क्यों सर अभी तो बस application से हो रहा था.
हवलदार:- application के साथ affidavit भी ज़रूरी है, हमारे पास और भी काम है.

साला बाद में समझ आया मुस्लिम था मेरा दोस्त इसलिए उसने application के साथ affidavit भी चिपका दिए.
कब सुधरेगा यार ये देश हमारा 

                                                         End of a Day for a Bright Morning