Thursday, 20 August 2015

ज़रा सोचिये!

 भाई ले डंडा तू भी पीट! ओये पप्पू तू क्यों कोने में खड़ा है इधर आ तू भी पीट! जी हाँ हम बात कर रहे हैं गुड़िया की एक ऐसा त्योहार जिसमे कपडे की बानी गुड़िया को मोहल्ले के लड़के डंडो से पीटते है और गुड़िया बना के लाने का काम लड़कीओ का होता है, कभी मां कभी बेटी कभी बहन तो कभी पत्नी के रूप में पूजी जाने वाली महिलाओं को चौराहे पर पीटा जाए तो यह उनके सम्मान को चोट पहुंचाने जैसा है। ये प्रथा आज से नही बल्कि सदीओ से चली आ रही है, रक्षाबंधन से कुछ दिन पहले नागपंचमी के दिन इसे मनाया जाता है, इस पर्व की कुछ ऐसी मान्यता है की एक राजा की लड़की जिसे प्यार से गुडिय़ा कह के बुलाते थे, वो एक दूसरे राज्य के राजा के बेटे से प्यार करने लगी थी। दुश्मन राज्य के राजा के बेटे से प्रेम की बात गुडिय़ा के भाइयों को रास नहीं आई जिसके चलते वह गुडिय़ा को बीच चौराहे पर लाठी डाँडो से पीट पीट कर मार डाला।
               गुड़िया के भाइयो ने इस याद को ताज़ा रखने  उसी दिन हर साल लड़कीओ से गुड़िया बनवा के लड़को से पिटवाने का आदेश दिए तबसे ले के आज तक ये कुरीती चली आ रही है, आज कल तो हम 3-10 साल के बच्चों को ये त्योहार मानते देख रहे हैं ज़रा सोचिये!

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