ये वकया आज सुबह का है, मैं हर रविवार सुबह फोटोवॉक पर निकलता हूँ साथ होते हैं मेरे कुछ फोटोग्राफर फ्रेंड मैंने आज कैमरा से नही मोबाइल के कमरे से फोटो खीचने का फैसला किया, इस दौरान मेरी नज़र वहां पर काम करते बच्चो पे पड़ी, उनमे से कई बहुत छोटे थे नींद के मारे आँख सूजी हुई थी पर मालिक के लिए पेपर की सेटिंग तो करनी ही थी मैंने उस बच्चे से बात की उसकी आवाज़ से उसकी नींद और थकान साफ़ ज़ाहिर हो रही थी, पर इसकी वजह से उसके काम पे कोई फरक नही पड़ रहा था, उसे काम निपटा के जल्दी घर जाना था मैंने उसे करीब 15 मिनट एकटक देखा और सोच रहा था उसके हालत के बारे में नींद जिससे हम समझौता नही करते उससे वो बच्चा लड़ रहा है, आखिर में उसने अपना काम खत्म किआ और उसके मालिक ने उसे करीब २५-३० रुपया दिए और वो घर की ओर चल दिए, उस समय तक मैंने उसकी कई तस्वीर ली उसमे से अपनी सबसे अच्छी तस्वीर आप सबसे साझा करता हुँ . Sunday, 12 April 2015
अख़बार की नींव
ये वकया आज सुबह का है, मैं हर रविवार सुबह फोटोवॉक पर निकलता हूँ साथ होते हैं मेरे कुछ फोटोग्राफर फ्रेंड मैंने आज कैमरा से नही मोबाइल के कमरे से फोटो खीचने का फैसला किया, इस दौरान मेरी नज़र वहां पर काम करते बच्चो पे पड़ी, उनमे से कई बहुत छोटे थे नींद के मारे आँख सूजी हुई थी पर मालिक के लिए पेपर की सेटिंग तो करनी ही थी मैंने उस बच्चे से बात की उसकी आवाज़ से उसकी नींद और थकान साफ़ ज़ाहिर हो रही थी, पर इसकी वजह से उसके काम पे कोई फरक नही पड़ रहा था, उसे काम निपटा के जल्दी घर जाना था मैंने उसे करीब 15 मिनट एकटक देखा और सोच रहा था उसके हालत के बारे में नींद जिससे हम समझौता नही करते उससे वो बच्चा लड़ रहा है, आखिर में उसने अपना काम खत्म किआ और उसके मालिक ने उसे करीब २५-३० रुपया दिए और वो घर की ओर चल दिए, उस समय तक मैंने उसकी कई तस्वीर ली उसमे से अपनी सबसे अच्छी तस्वीर आप सबसे साझा करता हुँ .
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